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Showing posts from March, 2026

माँ का ननिहाल और वहाँ की यादे

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  एक छोटा सा पारिवारि समारोह   कैसे कई पीढ़ियों को  फिर से एक साथ बैठा देता है—  यह कहानी याद दिलाती है कि  रिश्ते दूरी से नहीं, अपनापन  और स्नेह से जुड़े रहते हैं।  एक समारोह… और कई  पीढ़ियों का मिलना  “रिश्ते दूर नहीं होते…   बस  मिलने के मौके कम  हो  जाते हैं। और एक स्नेहपूर्ण,  सच्चा निमंत्रण  कई पीढ़ियों  को आपस में जोड़े रखता है.. पुरानी यादों, रिश्तों और कई पीढ़ियों को फिर से जोड़ देने के लिए। “माँ की ननिहाल का आँगन” ऐसी ही एक भावनात्मक स्मृति है। 📝 रूचि शर्मा   कभी-कभी एक छोटा सा समारोह सिर्फ एक खुशी नहीं लाता… वो कई पीढ़ियों को एक ही जगह बैठा देता है। कल मैं एक पारिवारिक समारोह में गई थी। घर से निकलते समय किसी ने पूछा — “कहाँ जा रही हो?” मैंने मुस्कुराकर कहा — “एक समारोह में एक नयी पीढ़ी का  आगमन हुआ है ।” फिर अगला सवाल आया — “किसके यहाँ?” अब असली कहानी यहीं से शुरू होती है। मैंने रिश्ता समझाना शुरू किया — “मेरी माँ की मौसी… उनकी बेटी… उनका बेटा… और अब उस बेटे के घर बेटा हुआ है।” मेरी ...

पहाड़ी दीदी

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🌿 पहाड़ी दीदी ✍️ रूचि शर्मा बहुत दिन हो गए थे पहाड़ों वाले घर गए हुए।  शहर की भागदौड़ और शोर के बीच अब मन ज़्यादा   देर टिकता ही नहीं। जब भी मन थोड़ा भारी होता है, हम दोनों गाड़ी उठाते हैं और निकल पड़ते हैं अपने उस सुकून वाले पहाड़ों की ओर... वहाँ की हवा में ही जैसे एक अलग सी शांति होती है।कभी आसपास की जगहों पर घूम आते हैं, कभी किसी छोटे से ढाबे पर लोकल खाना खा लेते हैं, और कभी चुपचाप बैठकर किताब पढ़ते रहते हैं। इस बार भी हम ऐसे ही अचानक निकल पड़े थे।  दिन भर पहाड़ों में घूमने के बाद जब हम वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक जगह गाड़ी थोड़ी देर के लिए रोकी। शाम धीरे-धीरे उतर रही थी और पहाड़ी हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी थी। तभी पीछे से एक आवाज़ आई — “सुनिये जी… क्या आप दोनों हमें नीचे तक छोड़ सकते हो? यहाँ से गाड़ी बहुत देर में आती है… हम काफी देर से खड़े हैं, घर भी जाना है, और घर जाते जाते रात तलक हो जाएगी ।” हमने पीछे मुड़कर देखा। एक पहाड़ी महिला पीछे खड़ी थीं और दूसरी हमसे बात कर रही थीं । उनके चेहरे पर हल्की थकान थी, लेकिन आँखों में एक सादगी भरी उम्मीद भी थी। अगर ...